छत्तीसगढ़ में अजूबा – नाक की जगह आँख वाले बकरे का जन्म, अनोखे बकरे को देखने के लिए लगी भीड़ : Hindi News

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Hindi News – छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के निवासी फरीद खान ने बकरी पाल रखी है। फरीद खान की बकरी ने एक ऐसे अनोखे बकरे को जन्म दिया है जिसको देख कर सब हैरान है। इस अनोखे और प्रकृति के अजूबे को देखने के लिए लोगों की भीड़ लग गई थी।

Wonder in Chhattisgarh, Birth of an eye goat instead of nose

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आपको बता दें की इस अजूबे बकरे में नाक है ही नही। नाक की जगह बकरे की दोनों आँखें है। और उसकी आँख वाली जगह में गहरे गड्ढे बने हुए हैं। नाक ना होने की वजह से यह बकरा अभी तक मुँह से साँस ले रहा है और ज़िंदा है।

बिलासपुर के पशु चिकित्सकों ने इस अजूबे बकरे का ऑपरेशन करके उसके नाक को बनाने की कोशिश की ताकि वह आराम से साँस ले सके, ले वो ऐसा करने में सफल नही हो पाए।

अजूबे बकरे को देखने के लिए लगी भीड़, लोग हैरान

आपको बता दें की प्रकृति के इस अजूबे बकरे का जन्म इसी रविवार यानी 9 अगस्त 2020 को हुआ है। फरीद खान के इस अजूबे बकरे को देखने के लिए उनके आस पास के लोगों ने भीड़ लगा दी थी। और इस अजूबे बकरे को देख कर सभी लोग हैरान रह गए।

फरीद खान ने बकरे की ऐसी हालत देखकर बिलासपुर के पशु चिकित्सक डॉ. अजय अग्रवाल से को बुलाया। इसके बाद उनकी सलाह पर इस बकरे को डॉ एसपी सिन्हा के पशु क्लीनिक ले जाया गया। क्लीनिक के वरिष्ठ डॉ आरएम त्रिपाठी और डॉ सिन्हा इस बकरे की स्तिथि को देखते हुए ऑपरेशन करके कोशिश कर रहे थे की शायद बकरा नाँक से साँस ले पाए, लेकिन वो भी ऐसा नही कर पाए।

क्लीनिक का बयान – साइक्लोपिया है वजह

क्लीनिक के वरिष्ठ डॉक्टर और सर्जन, इस बकरे का इलाज करने में सफल नही हो सके। क्लीनिक ने कहा कि बकरे की यह समस्या किसी बीमारी की वजह से नही हुई है, बल्कि यह गुणसूत्र की असामान्यता की एक समस्या है। गुणसूत्र की ऐसी असामान्यता को साइक्लोपिया कहा जाता है।

साइक्लोपिया का ऐसा ही केस केरल में आया था

क़रीब 9 साल पहले केरल में भी साइक्लोपिया का ऐसा केस मिला था। डॉ सिन्हा ने बताया कि 10 मई 2011 को एक ऐसे ही बकरे का जन्म केरल में हुआ था। यह बात करेब 9 साल पहले की है।

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