इंदौर नाम कैसे पड़ा » इंदौर नाम की व्युत्पत्ति और मूल

इंदौर शहर मध्य प्रदेश राज्य के पश्चिम क्षेत्र ‘मालवा’ में स्थित है और यह भारत के प्रमुख शहरों में से एक है। इस शहर का नाम एक रोमांचक इतिहास से जुड़ा हुआ है।

इंदौर नाम की व्युत्पत्ति उज्जैन पर विजय पाने की राह में हुई थी। इस राह पर राजा इंद्र सिंह ने काह्न नदी (आधुनिक नाम कान(Kahn) और विकृत नाम खान) के निकट एक शिविर रखा था। वे इस जगह की प्राकृतिक हरियाली से बहुत प्रभावित हुए थे और यहाँ की नदियों काह्न और सरस्वती के संगम की जगह पर एक शिवलिंग रखा था। 1731 ई. में इन्द्रेश्वर मंदिर का निर्माण प्रारंभ किया गया था जो भगवान शिव को समर्पित है। साथ ही इंद्रपुर की स्थापना भी की गई थी।

कई वर्षों बाद, जब पेशवा बाजीराव-1 द्वारा मराठा शासन के तहत, इसे मराठा सूबेदार ‘मल्हार राव होलकर’ को दिया गया था तब से इसका नाम इन्दूर पड़ा। ब्रिटिश राज के दौरान इस शहर का नाम अपने वर्तमान रूप इंदौर में बदल गया। इस प्रकार इंदौर नाम इंद्रेश्वर मंदिर से लिया गया है, जो भगवान शिव को समर्पित है और शहर में स्थित है।

हालाँकि कुछ लोगों का मानना है कि इंदौर शहर का नाम मूल रूप से संस्कृत शब्द ‘इन्द्रपुर’ से लिया गया है जिसका अर्थ है ‘इंद्र का नगर‘। इंद्र देव हिंदू धर्म में देवताओं के राजा और बादलों के नियंत्रक के रूप में जाना जाता है और इंदौर के नाम का यही मूल था

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