पाकिस्तान का नया GPS BeiDou: पाकिस्तान अब चीन का GPS सिस्टम उपयोग करेगा

पाकिस्तान के साथ चीन का सहयोग सैन्य उपकरणों की खरीद तक ​​सीमित नहीं है, बल्कि अंतरिक्ष परिसंपत्तियों के बंटवारे के साथ अधिक रणनीतिक हो रहा है। चीन के नेविगेशन सिस्टम BeiDou को जल्द ही पाकिस्तान द्वारा सैन्य और नागरिक उपयोग दोनों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा।

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चीनी नेविगेशन प्रणाली का उद्देश्य यूएस-आधारित ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (GPS) पर निर्भरता को बदलना और समाप्त करना है।

चीनी उपग्रह नेविगेशन कार्यालय (CSNO) पाकिस्तान में BeiDou-सक्षम सतत संचालन रडार स्टेशन (कोर) नेटवर्क स्थापित करने के लिए सहमत हो गया है। इसका उपयोग पाकिस्तान सटीक भू-स्थानिक अनुप्रयोग के लिए विशेष रूप से सर्वेक्षण और मानचित्रण, निर्माण और वैज्ञानिक अध्ययन के लिए करेगा।

CSNO, BeiDou ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (GNSS) की निगरानी और आकलन के लिए पाकिस्तान के अंतरिक्ष और ऊपरी वायुमंडल अनुसंधान आयोग (SUPARCO) में एक निगरानी स्टेशन भी स्थापित कर रहा है।

CSNO और SUPARCO के बीच सैटेलाइट नेविगेशन के क्षेत्र में सहयोग के समझौते पर मई 2013 में हस्ताक्षर किए गए थे।

3 अगस्त को चीन ने अपने नेविगेशन सिस्टम प्रोजेक्ट को पूरा करने की घोषणा की। चीन अब दक्षिण एशिया के अन्य देशों में नेटवर्क का विस्तार करने पर विचार कर रहा है।

दो दशकों तक चली इस परियोजना को समाप्त करने के लिए चीन ने अपने अंतिम सेटेलाइट का प्रक्षेपण 23 जून को किया था।

चीन ने 1990 के दशक में इस प्रणाली को विकसित करना शुरू किया और पहला उपग्रह 2000 में लॉंच करने के बाद से इसकी शुरुआत हुई थी।

रिपोर्ट के अनुसार पाकिस्तान चीनी रक्षा उपकरणों पर बहुत अधिक निर्भर है, अब पाकिस्तान सशस्त्र बल BeiDou के GPS पर शिफ्ट हो जाएगे और पूरी तरह से BeiDou के GPS का उपयोग करेंगे। 

चाहे वह आर्मर, वायु रक्षा प्रणाली, आर्टीलरी, यूएवी, जहाज, पनडुब्बी या लड़ाकू विमान हों, चीन लगातार पाकिस्तान की इन जरूरतों को पूरा कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना ​​है कि आने वाले समय में, पाकिस्तान अपने सभी महत्वपूर्ण सैन्य प्लेटफार्मों के लिए BeiDou नेविगेशन प्रणाली को पूरी तरह से उपयोग करना चालू कर देगा।

BeiDou 10m (33ft) तक उपयोगकर्ता के स्थान की पहचान कर सकता है, उसका वेग 0.2 मीटर प्रति सेकंड और घड़ी के सिंक्रनाइज़ेशन संकेतों को 50 नैनोसेकंड के भीतर कर सकता है।

पाकिस्तान चीन से सुदूर संवेदन उपग्रहों (रिमोट सेंसिंग सेटेलाइट) को भी खरीदने की प्लानिंग कर रहा है। सैन्य साजों-सामान के अलावा, चीन-पाकिस्तान का रक्षा सहयोग अब इन्फार्मेशन वॉरफेयर क्षेत्र में देखा गया है। पाकिस्तान को साइबर युद्ध के लिए भी चीन से सहायता मिलती रही है।

पाकिस्तान साइबर सूचना और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में चीनी सहयोग की मांग कर रहा है। यह इंटरनेट और वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल (वीओआईपी) की निगरानी में चीनी सहायता चाहता है।

चीन, पाकिस्तान के राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स कॉम्प्लेक्स में सूचना सुरक्षा लैब (इन्फार्मेशन सिक्योरिटी लैब) की स्थापना करके साइबर युद्ध के क्षेत्र में अपनी क्षमता को पाकिस्तान के लिए खोल रहा है।