धारकुंडी – श्री परमहंस आश्रम, जहाँ आप आध्यात्मिकता का अनुभव करते हैं – Sri Paramhans Dharkundi Ashram, Satna

मान्यताओं के अनुसार श्री सच्चिदानंद जी महाराज 22 नवंबर, 1956 को धारकुंडी आए थे। इससे पहले, यहां घने और डरावने जंगल के अलावा कुछ भी नहीं था। उस समय यहाँ पर 2 पर्वत के बीच में एक गुफा थी, जहां स्वामी जी एक शेर के साथ रहते थे। आज यही स्थान धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram) के नाम से प्रसिध्द है।

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DharkundiSri Paramhans Dharkundi Ashram (धारकुंडीश्री परमहंस आश्रम) : श्री परमहंस महाराज धारकुंडी आश्रम, मानिकपुर और सतना के पास एक सुंदर आध्यात्मिक स्थान है। धाकुंडी आश्रम वह स्थान है जहाँ प्रकृति आध्यात्मिकता से मिलती है। यह स्थान रानीपुर वन रेंज (जिसे रानीपुर वन्यजीव अभयारण्य के नाम से भी जाना जाता है) से घिरा हुआ है। यह वह स्थान है जहाँ दुनिया भर के लोग प्रकृति के प्राकृतिक सौंदर्य के साथ आध्यात्मिकता और शांति का अनुभव करने के लिए जाते हैं।

धारकुंडी – श्री परमहंस आश्रम (Dharkundi Ashram)

रसोइया (Rasoiya) में धारकुंडी आश्रम, सतना मध्य प्रदेश (Dharkundi Ashram, Satna Madhya Pradesh) – सतपुड़ा और विंध्याचल पर्वत श्रृंखला के बीच स्थित है। श्री परमानंद जी महाराज (Shri Parmanand Ji Maharaj) के सहयोग से, श्री सच्चिदानंद जी महाराज (Shri Sachidanand Ji Maharaj) ने चित्रकूट में सती अनुसुइया आश्रम में 11 वर्षों तक ध्यान किया और 1956 में इस धारकुंडी आश्रम की स्थापना की। अपनी आध्यात्मिक शक्ति से उन्होंने इस सुंदर आश्रम के माध्यम से इस प्राकृतिक स्थान को एक सार्थक रूप दिया।

Sri Paramhans Dharkundi Ashram, Satna
Sri Paramhans Dharkundi Ashram, Satna

धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram) में आने वाले सभी लोगों को फ्री में अच्छी गुणवत्ता वाला भोजन उपलब्ध कराया जाता है इसके लिए यहाँ पूरा दिन लंगर चलता है और भक्तगण सेवा में लगे रहते हैं। यह भोजन श्री सचिदानंद जी महाराज (Shri Sachidanand Ji Maharaj) के स्वामित्व वाली भूमि में ही उत्पादित अनाज और सब्जियों से तैयार किया जाता है। अब तो यह आश्रम एक ट्रस्ट के कंट्रोल में दे दिया गया है, जिसके हेड ट्रस्टी सतना ज़िला कलेक्टर हैं।

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धारकुंडी आश्रम का इतिहास (Dharkundi Ashram History)

धारकुंडी आश्रम (Dharkundi Ashram) के एक पुरोहित बाबा जी के अनुसार, श्री सच्चिदानंद जी महाराज 22 नवंबर, 1956 को इस स्थान पर आए थे। इससे पहले, यहां घने और डरावने जंगल के अलावा कुछ भी नहीं था। उस समय यहाँ पर 2 पर्वत के बीच में एक गुफा थी, जहां स्वामी जी एक शेर के साथ रहते थे।

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धाकुंडी आश्रम का अघमर्शन कुंड (Aghmarshan Kund in Dharkundi Ashram)

धारकुंडी में अघमर्शन कुंड (Aghmarshan Kund) अपनी पौराणिक पृष्ठभूमि के लिए प्रसिद्ध है, धारकुंडी जाने वाले सभी भक्तगण इस कुंड में स्नान करते हैं। इस अघमर्शन कुंड (Aghmarshan Kund) को पवित्र बताया जाता है और लोग कहते हैं कि यदि कोई इस स्थान पर स्नान करता है, तो यह आपके सभी पापों को धो देगा। इस पवित्र अघमर्शन जल कुंड की कुछ फ़ोटो नीचे दी गई हैं।

अघमर्शन कुंड का इतिहास – Aghmarshan Kund Dharkundi Ashram History

हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, युधिष्ठिर और यक्ष के बीच संवाद इसी अघमर्शन कुंड में हुई थी। अघमर्शन कुंड से जुड़ा एक और बहुत ही रोचक तथ्य जिसे आप महाभारत और भगवद गीता में पढ़ सकते हैं। उस के अनुसार, जब महाभारत के दौरान पांडवों ने कौरवों को मार डाला, तो उन्हें अपने परिवार के लोगों को मारने के लिए शाप दिया गया था।

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उस शाप से बाहर निकलने के लिए, भगवान कृष्णा ने युधिष्ठिर को सुझाव दिया कि वह रवि सप्तमी (7वें दिन जो कि 15 दिनों के चन्द्र चक्र में रविवार को आता है) पर अघमर्शन कुंड में स्नान करके शाप को दूर कर सकते हैं।

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कैसे पहुंचें धारकुंडी आश्रम – How to Reach Dharkundi Ashram

धारकुंडी आश्रम का निकटतम रेलवे स्टेशन मानिकपुर है, यह धारकुंडी से 46 किलो मीटर दूर है। धारकुंडी के लिए आप मणिपुर रेलवे स्टेशन से कैब किराए पर ले सकते हैं। धारकुंडी के लिए कोई बस सेवा उपलब्ध नहीं है। आपको एक निजी टैक्सी / कार / ऑटो किराए पर लेकर धारकुंडी आश्रम जा सकते हैं।

सतना रेलवे स्टेशन से भी धारकुंडी पहुँचा जा सकता है। सतना से धारकुंडी के लिए बस सेवा भी है। इसके अलावा सतना से बिरसिंहपुर के लिए पूरा दिन बस चलती हैं। किसी भी बस से बिरसिंहपुर पहुँचा जा सकता है। बिरसिंहपुर में भगवान गैवीनाथ मंदिर (Gaiveenath Mandir Birsinghpur) में दर्शन करने के बाद आप धारकुंडी के लिए कोई ऑटो/टैक्सी किराए पर लेकर जा सकते हैं या फिर धारकुंडी जाने वाली बस के आने का इंतेज़ार कर सकते हैं।

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इलाहाबाद (Allahabad) यानि प्रयागराज (Prayagraj) से धारकुंडी की दूरी 142 किलोमीटर है। कटनी (Katni) से धारकुंडी की दूरी 176 किलोमीटर है। सतना से दूरी 70 किलोमीटर और रीवा से 62 किलोमीटर है और मैहर से 108 किलोमीटर है।

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खजुराहो और प्रयागराज हवाई अड्डा धारकुंडी से निकटतम हवाई अड्डे हैं, खजुराहो हवाई अड्डे की दूरी 176 किलोमीटर है और प्रयागराज हवाई अड्डे से दूरी 124 किलोमीटर है। धारकुंडी से लखनऊ हवाई अड्डे की दूरी 254 किलोमीटर (यात्रा समय 6 घंटे कार से) और भोपाल हवाई अड्डा इस आध्यात्मिक स्थान से 504 किलोमीटर दूर है।

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रीवा से धारकुंडी की दूरी (Rewa to Dharkundi Distance)

रीवा से धारकुंडी की दूरी (Rewa to Dharkundi Distance) 61.2 किलोमीटर की है, फूल मति माता रोड (Phool Mati Mata Road) के माध्यम से 1 घंटा 33 मिनट में कार या बाइक से रीवा से धारकुंडी पहुँचा जा सकता है।

धारकुंडी महाराज की उम्र कितनी है ? – Dharkundi Maharaj Age

धारकुंडी महाराज 92 साल के हैं।

परमहंस आश्रम धारकुंडी कहाँ है?

धारकुंडी आश्रम को ही श्री परमहंस आश्रम धारकुंडी के नाम से जाना जाता है। यह मध्यप्रदेश के सतना ज़िला में घने जंगलों के बीच स्थित है।

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