त्रेतायुग का है गैविनाथ धाम का शिवलिंग, बिरसिंहपुर पर्यटन का केंद्र : Gaivinath Temple – Birsinghpur Satna

Gaivinath Temple - Birsinghpur Satna : सतना जिले के बिरसिंहपुर तहसील में स्थित गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple) में भगवान गैविनाथ (शिव) के दर्शन करने के लिए भक्तों की लाइन लगती है। माना जाता है, की गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple) में स्थित शिवलिंग त्रेतायुग का है, यह चूल्हे से निकला था।

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Gaivinath Temple – Birsinghpur Satna : सतना जिले के बिरसिंहपुर तहसील में स्थित गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple) में भगवान गैविनाथ (शिव) के दर्शन करने के लिए भक्तों की लाइन लगती है। माना जाता है, की गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple) में स्थित शिवलिंग त्रेतायुग का है, यह चूल्हे से निकला था।

यह शिवलिंग यादव के घर से निकला था, गैवी की मां मूसल से मारकर हमेशा इस शिवलिंग को ज़मीन के अंदर कर देती थी। इस मंदिर का इतिहास राजा वीर सिंह से जुड़ा हुआ है। यह शिवधाम जिला सतना में है़। प्रत्येक रविवार को इस मंदिर में विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन यहां एक बड़ा मेला भी लगता है।

गैवीनाथ मंदिर, बिरसिंहपुर : Gaivinath Temple – Birsinghpur Satna

बिरसिंहपुर ‘गैवीनाथ धाम‘ के रूप में से उल्लेखित किया जाता है। बिरसिंहपुर की सतना शहर से दूरी 35 किलोमीटर की है। बिरसिंहपुर सतना एक तहसील है। आज के समय में गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple) की वजह से ही बिरसिंहपुर (Birsinghpur) की पहचान है। गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple – Birsinghpur) को भगवान शिव के शिवलिंग अवतार के लिए जाना जाता है।

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Gaivinath Temple Birsinghpur - Satna
Gaivinath Temple Birsinghpur – Satna

बिरसिंहपुर के इस गैवीनाथ शिवलिंग को महाकाल शिवलिंग उज्जैन का दूसरा रूप भी कहा जाता है। स्थानीय लोगों की मान्यता है कि चारों धाम की यात्रा के बाद इस शिव मंदिर में जलाभिषेक करने के बाद ही चारोंधाम की यात्रा का फल मिलता है।

अगर आप सतना के पर्यटन स्थल की खोज रहे हैं, तो आपको इस गैवीनाथ मंदिर में ज़रूर भगवान शिव के दर्शन के लिए जाना चाहिए। इस मंदिर का इतिहास बहुत ही पुराना त्रेतायुग का माना जाता है, मान्यताओं के अनुसार मंदिर के बनने से पहले यहाँ ‘गैवी’ नाम की एक वृद्ध महिला निवास करती थी और यहाँ का पूरा इलाक़ा जंगल था, जहाँ खतरनाक जानवर भी रहते थे।

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बिरसिंहपुर के गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple – Birsinghpur) में भगवान शिव की खंडित शिवलिंग की पूजा की जाती है। इस शिवलिंग का वर्णन ‘पद्म पुराण’ के पाताल खंड में भी किया गया है। पद्म पुराण के अनुसार जिस समय त्रेतायुग में यहाँ का राजा वीर सिंह था तब बिरसिंहपुर का नाम देवपुर था।

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पुरानी मान्यताओं के अनुसार राजा वीर सिंह भगवान महाकाल को जलाभिषेक करने के लिए अपने घोड़े से उज्जैन जाया करते थे। वह लगभग 650 वर्षों तक हमेशा उज्जैन महाकाल मंदिर जाते थे, लेकिन जब राजा वृद्ध हो गए और उनको उज्जैन जाने में परेशानी होने लगी। इसके बाद की कहानी नीचे दी गई है।

भगवान महाकाल ने देवपुर में दर्शन देने की बात राजा से कही

राजा ने एक बार भगवान महाकाल को अपनी परेशानी बताई उसके बाद भगवान ने राजा को सपने में दर्शन दिए और कहा की वो अब देवपुर में ही उनको दर्शन देंगे। इसके बाद गैवी नाम के एक यादव के घर के चूल्हे में रोज़ाना रात को एक शिवलिंग निकला करता था, जिसे गैवी की माँ मूसल से मार कर अंदर कर देती थी।

राजा वीर सिंह ने गैवी को बुलाया

एक दिन राजा वीर सिंह के सपने में भगवान महाकाल आए और कहा की मैं तुम्हारी पूजा से प्रसन्न होकर रोज़ाना इस भूमि पर निकलने की कोशिश करता हूँ लेकिन गैवी की माँ निकलने नही देती। इसके बाद राजा ने गैवी यादव को बुलावा भेजा और उससे अपनी बता कही। इसके बाद गैवी ने उस स्थान को खाली कराया जहाँ शिवलिंग निकलता था।

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महाकाल के उपलिंग के रूप में पहचान

इसके बाद राजा वीर सिंह ने जिस स्थान पर शिवलिंग निकला था, वही पर मंदिर का निर्माण करवाया और इस शिवलिंग का नाम भगवान गैवीनाथ करवा दिया। तब से बिरसिंहपुर के इस शिवलिंग को भगवान गैवीनाथ के रूप में पहचाना जाता है।

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मान्यताओं के अनुसार जो लोग उज्जैन के महाकाल के दर्शन नही कर सकते वो अगर इस गैवीनाथ धाम में शिवलिंग के दर्शन कर लेते हैं तो उतना ही पुण्य मिलता है।

लोग करते हैं चारधाम के जल से जलाभिषेक

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार जो लोग चारोंधाम की यात्रा के लिए जाते हैं, वो अगर लौट कर चारोधाम का जल गैवीनाथ में चढ़ाते हैं, तो चारोधाम से ज़्यादा पुण्य मिलता है। अगर चारोधाम की यात्रा के बाद यहाँ जल नही चढ़ाया जाता है, तो यात्रा अधूरी मानी जाती है।

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विंध्य क्षेत्र में गैवीनाथ बहुत प्रचलित हैं (Gaivinath Temple – Birsinghpur)

महाशिवरात्रि के दिन बिरसिंहपुर के इस गैवीनाथ मंदिर पर भक्तों की भीड़ लगी रहती है, पूरे विंध्य क्षेत्र से भक्तगण यहाँ दर्शन के लिए आते हैं। मनमास के महीने में भी इस मंदिर में जलाभिषेक का अपना अलग ही महत्व है, इसी वजह से मनमास के महीने में इस मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ लगती है। हर सोमवार को मंदिर में हज़ारों भक्त भगवान गैविनाथ को जलाभिषेक करने के लिए आते हैं। भगवान गैविनाथ अपने हर भक्त की मुराद पूरी करते हैं और उनको निराश नही होने देते हैं।

कैसे पहुंचें : How to Reach Gaivinath Temple – Birsinghpur, Satna

अगर आप सतना आएँ हैं, तो आप सतना से बस लेकर या फिर टैक्सी से सीधे बिरसिंहपुर के गैवीनाथ मंदिर जा सकते हैं। इसके अलावा यहाँ पर वायुमार्ग, ट्रेन, सड़क मार्ग से पहुँचा जा सकता है जिसके बारे में नीचे जानकारी दी गई है।

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वायु मार्ग

बिरसिंहपुर का सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा खजुराहो एयरपोर्ट है। आप खजुराहो एयरपोर्ट से सतना आए इसके बाद बिरसिंहपुर जा सकते हैं।

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ट्रेन द्वारा

बिरसिंहपुर पहुँचने के लिए सबसे नज़दीकी और मुख्य रेलवे स्टेशन ‘सतना रेलवे स्टेशन’ है। सतना रेलवे स्टेशन आने के बाद आप बिरसिंहपुर जाने के लिए बस, टैक्सी या फिर ऑटो का इस्तेमाल कर सकते हैं।

सड़क मार्ग

सड़क मार्ग से भी बिरसिंहपुर पहुँचा जा सकता है। अगर आप सतना से जैतवारा रोड से बिरसिंहपुर जाते हैं तो इसकी दूरी सिर्फ़ 40 किलोमीटर है। इसके अलावा आप कोटर रोड से भी बिरसिंहपुर पहुँच सकते हैं। इस रास्ते पर पूरा दिन बस और टैक्सी चलती हैं।

बिरसिंहपुर के गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple – Birsinghpur) जाने का उपयुक्त समय

सतना ज़िला सभी मौसम में घूमने के लिए बेहतर शहर है। फिर भी हम आपको जुलाई से मार्च के बीच घूमने के लिए कहेंगे, क्योंकि गर्मी के मौसम में कड़ी धूप में कोई घूमना पसंद नही करेगा।

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औरंगजेब ने किया था भगवान गैवीनाथ पर हमला

इतिहास में उल्लेख मिलता है कि मुगल साम्राज्य के क्रूर शासक औरंगजेब को जब बिरसिंहपुर के इस गैवीनाथ मंदिर (Gaivinath Temple – Birsinghpur, Satna) की जानकारी मिली, तो वह अपनी सेना लेकर इस शिवधाम को नष्ट करने आया और आते ही उसने अपनी तलवार से गैवीनाथ शिवलिंग पर वार किया तो इस शिवलिंग से ख़ून बहने लगा और फिर जैसे से औरंगजेब ने दूसरा प्रहार किया तो शिवलिंग के हिस्से से ढेर सारी मधुमक्खी और बर्र निकलने लगे और जब औरंगजेब ने तीसरा प्रहार किया तो शिवलिंग से एक विशाल साँप प्रकट हुआ। जिसको देखने के बाद औरंगजेब डर के मारे देवपुर (वर्तमान गैवीनाथ धाम, बिरसिंहपुर) से भाग निकला।

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