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Satna Tourist Places Main Attractions : मध्यप्रदेश के शांत वन्य प्राणियों से लेकर प्राणपोषक जंगल तक विविध और विशाल अनुभव प्रदान करते हैं। मध्य प्रदेश का समृद्ध इतिहास इसकी अद्भुत वास्तुकला और प्राचीन युग के मंदिरों से स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

सतना मध्य प्रदेश (Satna Madhya Pradesh) के पूर्वोत्तर में स्थित एक ऐसा स्थान है जो प्राचीन भारत के चमत्कारों और इतिहास में अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। सतना में भारत की शानदार सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत को याद करने के लिए कई धार्मिक और ऐतिहासिक स्थल स्थित हैं।

Satna Tourist Places

सतना की सीमा उत्तर प्रदेश राज्य से लगती है। यदि आपकी रुचि पौराणिक कथाओं, लोककथाओं और कहानियों में है, तो सतना की यात्रा आपके लिए दिलचस्प होगी क्योंकि यह स्थान हिंदू पौराणिक कथाओं के साथ गहराई से जुड़ा हुआ है। ऐसा माना जाता है कि भगवान राम चित्रकूट में रहते थे, जिसका आधार भाग मध्य प्रदेश और आधा भाग उत्तर प्रदेश में पड़ता है।

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चित्रकूट, बिरसिंघपुरम और मैहर, सतना में धार्मिक महत्व के लोकप्रिय स्थान हैं, यहाँ हमेशा पर्यटकों की भीड़ लगी रहती है। इन स्थानों पर स्थित मंदिरों को शुभ और पूजनीय माना जाता है। हिंदू महाकाव्य महाभारत के अनुसार, इस क्षेत्र पर चेदि, हैहया या कलचुरी राजवंशों द्वारा शासन किया गया था। भरहुत सतना का एक और प्राचीन शहर है, जो बुद्ध के पुरातात्विक अवशेषों से परिपूर्ण है।

सतना में एक जीवंत संस्कृति आपको देखने को मिलेगी, क्योंकि यहाँ की संस्कृति विभिन्न जनजातीय समूहों की परंपराओं का एक उदार मिश्रण है। यह शहर अपने संगीत, शिल्प और नृत्य के लिए जाना जाता है। बिहारी मंदिर इस क्षेत्र का सांस्कृतिक केंद्र है और राम लीला समारोहों के लिए प्रसिद्ध है जिसे स्थानीय लोगों के साथ-साथ राज्य के बाहर के लोग भी देखने आते हैं।

सतना के मुख्य पर्यटन स्थल (Satna Main Tourist Places)

सतना जिले में चित्रकूट और मैहर दो प्रमुख धार्मिक पर्यटन स्थल हैं। सतना जिले को ‘भरहुत’ नामक बौद्ध संस्कृति का एक प्राचीन शहर होने का भी गर्व है, जिसके पुरातत्व अवशेष देश और दुनिया के प्रमुख संग्रहालयों को उपहार में दिए गए हैं। रामवन में तुलसी संग्रहालय में इस क्षेत्र में प्राचीन काल की कई अनूठी कलात्मक मूर्तियाँ हैं। बिरसिंहपुर में भगवान शिव मंदिर भी क्षेत्र में एक प्रसिद्ध और पुराना मंदिर है।

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सतना के कुछ मुख्य पर्यटन स्थलों के नाम निम्नलिखित हैं :

  1. भरहुत स्तूप ॰ Bharhut Stupa
  2. खजुराहो मंदिर ॰ Khajuraho Temples
  3. माँ शारदा देवी मंदिर ॰ Ma Sharda Mata, Maihar Satna
  4. मांधवगढ़ का क़िला ॰ Madhavgarh Fort
  5. वेंकटेश मंदिर ॰ Venktesh Temple, Satna
  6. रामवन ॰ Ramban Satna
  7. गिद्धराज पर्वत ॰ Griddhraj Parvat
  8. पन्नीलाल चौक ॰ Pannilal Chowk
  9. शिव मंदिर – बिरसिंघपर ॰ Shiv Temple – Birsinghpur
  10. चित्रकूट धाम ॰ Chitrakoot Dham
  11. रीवा का क़िला ॰ Rewa Fort

भरहुत स्तूप ॰ Bharhut Stupa, Satna

भरहुत स्तूप (Bharhut Stupa) सम्राट अशोक द्वारा लगभग 100 ईसा पूर्व स्थापित करवाया गया था और बाद में सुंग वंश के शासकों द्वारा इसमें कुछ सुधार करवाया गया था। इस साइट की खोज पहली बार 1873 में अलेक्जेंडर कनिंघम ने की थी। स्तूप के कुछ अवशेष कोलकाता के भारतीय संग्रहालय (Indian Museum) में संरक्षित हैं। स्तूप की रेलिंग में सुंदर नक्काशी की गई है जिसमें सजावटी थीम, कथा दृश्य और विभिन्न आकृतियां हैं।

यहाँ पर बोधि वृक्ष, पैरों के निशान, खाली सीट, धर्म पहिया आदि जैसे सामान्य प्रतीकों के माध्यम से बुद्ध का प्रतिनिधित्व किया गया है। सम्राट अशोक ने स्तूप का निर्माण करवाया था, लेकिन कई कार्य जैसे कि प्रवेश द्वार और रेलिंग को शुंग वंश द्वारा जोड़ा गया था।

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खजुराहो मंदिर ॰ Khajuraho Temples, Satna Tourist Destinations

सतना से लगभग 114 किमी दूर स्थित खजुराहो मंदिर पर्यटकों के बीच बहुत प्रसिद्ध है। यह एक विश्व धरोहर स्थल है जो इतिहास, विरासत, वास्तुकला, प्रेम और जुनून का एक जीता-जागता सबूत है। इसे प्राचीन भारत के चमत्कारों में से एक के रूप में माना जाता है, इन मंदिरों का निर्माण चंदेला राजवंश के शासकों ने 950 ई.पू. से 1050 ई के मध्य करवाया था।

यहाँ पर एक ही परिसर के अंदर 85 जैन और हिंदू मंदिर बलुआ पत्थर से बनाए गए हैं और सभी मंदिरों को शानदार आर्ट और मूर्तिकला के साथ सजाया गया है। खजुराहो मंदिर की लगभग 10 प्रतिशत नक्काशी में Erotic Art का निर्माण किया गया है। खजुराहो पहुंचने का सबसे सस्ता और तेज़ तरीका सतना से टैक्सी लेकर जाना है।

माँ शारदा देवी मंदिर ॰ Ma Sharda Mata, Maihar – Satna

सतना के मैहर में स्थित माँ शारदा देवी मंदिर एक लोकप्रिय धार्मिक स्थल है। यह मंदिर त्रिकुटा पहाड़ी के ऊपर स्थित है, मंदिर तक पहुँचने के लिए लगभग 1063 सीढ़ियाँ हैं। इसके साथ ही एक रोपवे भी है, जिससे आप सीधे मंदिर तक पहुँच सकते हैं।

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मैहर का अपना इतिहास भी है। यह माना जाता है कि माता पार्वती के यज्ञ में सती होने के बाद जब शिव तांडव मृत देवी सती के शरीर को अपने हाथों में लेकर तांडव कर रहे थे, तो माता सती के गले का हार यहां गिर गया था, जिससे इस स्थान का नाम मैहर पड़ा। इसके साथ ही यह एक शक्तिपीठ भी है। यहाँ आप ट्रेन से आसानी से पहुँच सकते हैं।

मांधवगढ़ का क़िला ॰ Madhavgarh Fort, Places to Visit in Satna

सतना में विभिन्न धार्मिक स्थलों के अलावा भी कई स्थान और ऐतिहासिक संरचनाएँ हैं जो पर्यटकों के बीच बहुत लोकप्रिय हैं, उन्हीं में से एक माधवगढ़ किला है जिसका निर्माण लगभग 400 साल पहले माधोसिंह जी द्वारा करवाया गया था। वर्ष 2000 में ठाकुर भवानी सिंह जी द्वारा इस क़िले को हेरिटेज होटल में परिवर्तित कर दिया गया था।

किले को 1787 में मराठों की लड़ाई के लिए याद किया जाता है। यह तुंगा युद्ध के मैदान के साथ-साथ एक राजस्थानी गांव के ऊपर स्थित है जो कई स्थानीय कारीगरों और हस्तशिल्पों का घर है। किले के भीतर प्रताप महल सुइट है, जिस कमरे में महाराजा प्रताप सिंह इसी के साथ देवड़ी फूल महल भी है।

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किला एक समय रीवा साम्राज्य का केंद्र था। किले के गुंबदों की आकृति और अंदरूनी हिस्सों पर बनाई गई खूबसूरत कलाकृतियाँ इसे ऐतिहासिक और स्थापत्य की दृष्टि से देखने लायक बनाती है।

वेंकटेश मंदिर ॰ Venktesh Temple, Satna ॰ Satna Tourist Places

वेंकटेश मंदिर सतना शहर के मुख्तारगंज के पास स्थित है। इसका निर्माण 1876 में करवाया गया था। यह मंदिर लाल पत्थर से बनाया गया है। इसको दक्षिण भारतीय मंदिरों के डिजाइन के आधार पर बनाया गया है।

सतना के वेंकटेश मंदिर को बनाने के लिए लगभग 49 साल लग गए, इसके लिए श्रमिक दक्षिण भारत से आए थे। यहां होने वाले धार्मिक कार्यक्रमों में गुरु पूर्णिमा, झूलन उत्सव, नरसिंह चतुर्दशी, जन्माष्टमी, रामनवमी, शरद पूर्णिमा और बहुत कुछ शामिल हैं। रणदमन सिंह द्वारा स्थापित यह मंदिर विंध्य क्षेत्र के सबसे पुराने मंदिरों में से एक है।

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रामवन ॰ Ramban Satna

सतना के रीवा रोड में स्थित, रामवन में मंदिरों के प्राचीन अवशेष पाए जाते हैं। यहाँ के मुख्य मंदिरों में से एक हनुमान मंदिर है। रामवन युवा और वृद्ध दोनों के घूमने लायक़ बेहतरीन जगह है। यहाँ का शांत वातावरण, उद्यान और परिसर रामवन को सतना के सबसे अधिक देखे जाने वाले स्थलों में से एक बनाते हैं। रामवन में तुलसी संग्रहालय भी है जहाँ पर यहाँ की प्राचीन मंदिरों की मूर्तियां संरक्षित हैं। इस तुलसी संग्रहालय में आप पहले की पीढ़ियों की कलात्मकता शक्ति को आप देख सकते हैं।

गिद्धराज पर्वत ॰ Griddhraj Parvat – Satna Tourist Places

ग्गिद्धराज पर्वत सतना जिले की तहसील रामनगर के देवराजनगर गांव में स्थित धार्मिक, पुरातत्व और पारिस्थितिक महत्व की एक पहाड़ी है। यह रामनगर शहर से 8 किमी दूर स्थित है। हिंदू पौराणिक कथाओं में गिद्धराज पर्वत का ख़ास धार्मिक महत्व है।

स्कंद पुराण में इसका उल्लेख ‘गृधांचल पर्वत’ के रूप में किया गया है। ऐसा माना जाता है कि यह स्थान रामायण में वर्णित गीधराज ‘जटायु’ के भाई संपति का जन्मस्थान है। कवि कालिदास ने अपनी पुस्तक ‘गिद्धराज महात्म्य – नारद उवाच’ में इस स्थान को सबसे पवित्र बताया है। उन्होंने लिखा है कि 2,354 फीट की ऊंचाई पर स्थित गिद्धराज पर्वत से निकलने वाली मानसी गंगा नदी में एक डुबकी लगाने से सभी तरह के पापों से मुक्ति मिलती है।

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ब्रह्मा के पुत्र और फिर देवी पार्वती ने पहली बार इस पहाड़ी को देखा। इसका उल्लेख शिव संहिता में भी मिलता है, चीनी यात्री फा-हेन ने भी इस स्थान का दौरा किया और इसका उल्लेख अपनी पुस्तक में किया था। इस पर्वत को गृद्धकूट पर्वत भी कहा जाता है। स्थानीय लोग इसे ‘गिद्धहा पहाड़’ कहते हैं।

पन्नीलाल चौक ॰ Pannilal Chowk

शहर के सबसे व्यस्त इलाकों में से एक पन्नीलाल चौक सतना का दिल है। यहाँ की भीड़, शॉपिंग के लिए दुकाने और मुँह में पानी लाने वाले स्ट्रीट फूड के साथ पन्नीलाल चौक शहर के मुख्य केंद्र जैसा दिखता है। यह सतना का मुख्य मार्केट भी है।

यहाँ पर आपको सभी प्रकार के माल और उत्पादों को बेचने वाली दुकाने मिल जाएँगी। पर्यटकों के लिए विशेष रूप से पन्नीलाल चौक एक शहर का एहसास देता है।

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शिव मंदिर – बिरसिंघपर ॰ Shiv Temple – Birsinghpur

बिरसिंहपुर में भगवान शिव मंदिर भी इस क्षेत्र में एक प्रसिद्ध और पुराना मंदिर है। यह सतना से लगभग 35 किमी उत्तर में है। यहाँ के शिव मंदिरों की मूर्ति बहुत सुंदर है। इस मंदिर में लोग बड़ी आस्था के साथ आते हैं। प्रत्येक रविवार को मंदिरों में एक विशेष आरती का आयोजन किया जाता है। महाशिवरात्रि के दिन यहां एक बड़ा मेला भी लगता है।

चित्रकूट धाम ॰ Chitrakoot Dham – Satna Tourist Places

चित्रकूट में धार्मिक महत्व के बहुत सारे स्थान शामिल हैं, जिसे भक्तों और दर्शनार्थियों द्वारा देखा जाता है। प्रशासनिक दृष्टिकोण से, इनमें से कुछ स्थान उत्तर प्रदेश और कुछ स्थान मध्य प्रदेश में स्थित हैं। चूंकि ये सभी स्थान लोगों की धार्मिक भावनाओं से लोकप्रिय हैं और बड़ी संख्या में तीर्थयात्री इन स्थलों पर जाते हैं। चित्रकूट पहुँचने के लिए ट्रेन के साथ-साथ सड़क मार्ग का भी उपयोग किया जाता है।

चित्रकूट ऐसा स्थान है जहाँ पर भगवान राम, भाई लक्ष्मण और सीता माता के साथ वनवास का अधिकतम समय व्यतीत किए थे।

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रीवा का किला ॰ Rewa Fort – Satna Tourist Places

सतना से लगभग 60 किमी दूर स्थित, रीवा किला (Rewa Fort) आपको बीते युग के गौरवशाली अतीत में ले जाता है। किले का निर्माण सलीम शान द्वारा शुरू किया गया था और फिर इसकी संरचना को रीवा के राजा, महाराजा विक्रमादित्य द्वारा पूरा करवाया गया था।

यह बेहतरीन किला भारत की एक ऐतिहासिक विरासत है जो पर्यटकों को आवास भी प्रदान करता है। यहाँ आप भारत के राजाओं की रॉयल्टी और भव्यता का अनुभव कर सकते हैं। किले में एक संग्रहालय भी है जहां आप रीवा के राजाओं की मूल्यवान संपत्ति देख सकते हैं।

हालाँकि आपको बता दें की Rewa District अब सतना का हिस्सा नही है। अगर आप सतना घूमने जाना चाहते हैं, तो रीवा ज़रूर जाएँ।

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सतना कैसे पहुँचें (How To Reach Satna)

सतना (Satna) पहुँचने के 3 तरीके हैं सड़क मार्ग से, ट्रेन द्वारा और हवाई मार्ग से। जिनके बारे में नीचे विस्तार से जानकारी दी गई है।

हवाई मार्ग से (By Air): सतना हवाई अड्डा चेन्नई, मुंबई, दिल्ली सहित देश के प्रमुख शहरों से घरेलू उड़ानों को जोड़ता है। पास के अन्य हवाई अड्डों में खजुराहो हवाई अड्डा (Khajuraho Airport) शामिल है, जो सतना से लगभग 114 किमी दूर है। जबलपुर हवाई अड्डा (Jabalpur Airport) एक और विकल्प है, जो लगभग 200 किमी दूर है।

ट्रेन द्वारा (By Train): सतना के निकटतम रेलवे स्टेशनों में सतना रेलवे स्टेशन, मैहर स्टेशन (सतना से 37 किमी), मानिकपुर जंक्शन (सतना से 60 किमी) और खजुराहो रेलवे स्टेशन शामिल हैं। कई शहरों से सतना रेलवे स्टेशन के लिए नियमित ट्रेनें हैं। सतना बिहार और उत्तरप्रदेश से महाराष्ट्र और गुजरात जाने वाली ट्रेनों के लिए मुख्य लाइन भी है। यहाँ से आप आसानी से देश के किसी भी शहर में ट्रेन से जा सकते हैं।

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सड़क मार्ग से (By Road): राष्ट्रीय राजमार्ग-7 (National Highway 7), सतना को भारत के कई हिस्सों से जोड़ता है। छतरपुर-रीवा से होकर गुजरने वाला राज्य राजमार्ग (State Highway) इस क्षेत्र को मध्य प्रदेश के अन्य स्थानों से जोड़ता है।

सतना घूमने का सबसे बेहतर समय (Best Time To Visit Satna)

सर्दियों में सतना में मौसम सुखद, ठंडा और आरामदायक होता है। इसलिए, यह दर्शनीय स्थलों की यात्रा और अन्य बाहरी गतिविधियों के लिए एकदम सही समय है। सर्दियों में सतना का तापमान 15°C से नीचे नहीं जाता है। अक्टूबर से मार्च के बीच का समय सतना घूमने के लिए उपयुक्त समय है। हालांकि, सतना में गर्मी के महीने गर्म और आर्द्र होते हैं और इसलिए यह भी अच्छा है। मई से सितंबर मानसून का मौसम है, जब सतना में भारी बारिश होती है। हालाँकि सतना एक ऐसा शहर है, जहाँ आप वर्ष के किसी भी महीने में घूम सकते हैं।

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